चाय बेचने वाले बेटे ने बिना कोचिंग बनकर दिखाया IAS, हिमांशु गुप्ता की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा

By Ashish Jha

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देश में हर साल लाखों युवा UPSC परीक्षा की तैयारी करते हैं। कुछ छात्र महंगी कोचिंग लेते हैं, तो कुछ संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। लेकिन उत्तराखंड के हिमांशु गुप्ता ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कठिन से कठिन हालात भी रास्ता नहीं रोक सकते। चाय बेचने वाले परिवार से निकलकर IAS अधिकारी बनने तक का उनका सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।

गरीबी में बीता बचपन, पिता के साथ बेची चाय

हिमांशु गुप्ता का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। उनका परिवार बेहतर जीवन की तलाश में उत्तराखंड से बरेली आया था। घर चलाने के लिए उनके पिता ने छोटी सी चाय की दुकान शुरू की। स्कूल से लौटने के बाद हिमांशु भी दुकान पर हाथ बंटाते थे। कभी चाय परोसते, कभी बर्तन साफ करते और कभी ग्राहकों से बातें सुनते।

उनकी जिंदगी आम बच्चों जैसी नहीं थी। कई बार परिवार के पास जरूरी जरूरतें पूरी करने तक के पैसे नहीं होते थे। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिमांशु ने पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा। गरीबी उनके सपनों के बीच दीवार नहीं बन सकी।

रोज 70 किलोमीटर का सफर और पढ़ाई का जुनून

हिमांशु के संघर्ष का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें स्कूल जाने के लिए रोज करीब 70 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। लंबी दूरी, आर्थिक परेशानी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी।

उन्हें अंग्रेजी भाषा में भी काफी दिक्कत होती थी। अंग्रेजी सीखने के लिए उन्होंने अतिरिक्त मेहनत की। इंटरनेट, अखबार और पुराने अध्ययन सामग्री की मदद से उन्होंने खुद को बेहतर बनाया। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया।

अखबार और लाइब्रेरी बने सबसे बड़े शिक्षक

हिमांशु गुप्ता ने कभी महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। चाय की दुकान पर आने वाले अखबार उनके लिए ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत बन गए। वहीं बैठकर उन्होंने देश-दुनिया की खबरों को समझना शुरू किया।

उन्होंने लाइब्रेरी में घंटों बैठकर पढ़ाई की। इंटरनेट से नोट्स तैयार किए और पुराने प्रश्नपत्रों का लगातार अभ्यास किया। यही सेल्फ स्टडी आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

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दिल्ली यूनिवर्सिटी पहुंचकर भी खत्म नहीं हुआ संघर्ष

अच्छे अंकों के कारण हिमांशु को दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज में दाखिला मिल गया। लेकिन दिल्ली का नया माहौल उनके लिए आसान नहीं था। नई भाषा, नए लोग और बढ़ते खर्च ने मुश्किलें और बढ़ा दीं।

उन्होंने हार नहीं मानी। पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। साथ ही स्कॉलरशिप का सहारा लिया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को मजबूत बनाया और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।

बिना कोचिंग तीन बार पास की UPSC परीक्षा

हिमांशु गुप्ता की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद के UPSC परीक्षा पास की। उन्होंने पहली बार में IRTS सेवा हासिल की। लेकिन उनका सपना IAS बनना था।

दूसरे प्रयास में वह IPS अधिकारी बने। इसके बाद भी उन्होंने तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 139 हासिल कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया। उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण खुद को कमजोर समझते हैं।

हिमांशु गुप्ता की सफलता का मंत्र

हिमांशु का मानना है कि सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज मेहनत और निरंतर प्रयास है। उन्होंने हमेशा NCERT किताबों, अखबारों और बेसिक कॉन्सेप्ट्स पर ध्यान दिया। साथ ही नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास को अपनी ताकत बनाया।

उनका कहना है कि सपने हमेशा बड़े देखने चाहिए। अगर इंसान खुद पर विश्वास रखे और लगातार मेहनत करता रहे, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

युवाओं के लिए बड़ी सीख

हिमांशु गुप्ता की कहानी बताती है कि सफलता केवल बड़े शहरों या महंगी कोचिंग पर निर्भर नहीं करती। मजबूत इरादे, अनुशासन और मेहनत इंसान को किसी भी ऊंचाई तक पहुंचा सकते हैं।

आज उनकी कहानी उन लाखों छात्रों को प्रेरित कर रही है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को सच करना चाहते हैं। चाय बेचने वाले बेटे का IAS बनना इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

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अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमांशु गुप्ता कौन हैं?

हिमांशु गुप्ता एक IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने बेहद साधारण परिवार से निकलकर UPSC परीक्षा पास की।

क्या हिमांशु गुप्ता ने कोचिंग ली थी?

नहीं, उन्होंने बिना किसी महंगी कोचिंग के सेल्फ स्टडी के जरिए UPSC परीक्षा पास की।

हिमांशु गुप्ता ने UPSC कितनी बार पास की?

उन्होंने तीन बार UPSC परीक्षा पास की। पहले IRTS, फिर IPS और अंत में IAS बने।

हिमांशु गुप्ता का मूल निवास कहाँ है?

वे उत्तराखंड के सितारगंज क्षेत्र से संबंध रखते हैं।

हिमांशु गुप्ता की कहानी क्यों प्रेरणादायक मानी जाती है?

क्योंकि उन्होंने गरीबी, संसाधनों की कमी और संघर्षों के बावजूद अपने सपनों को पूरा किया।

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