देशभर में निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबें थोपने की शिकायतों के बीच अब National Human Rights Commission (NHRC) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने शिक्षा मंत्रालय, Central Board of Secondary Education (CBSE) और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह कार्रवाई उन शिकायतों के आधार पर की गई है, जिनमें आरोप लगाया गया कि कई निजी स्कूल छात्रों को महंगे निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ तेजी से बढ़ रहा है और शिक्षा की समानता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
NHRC का नोटिस: क्या है पूरा मामला
NHRC ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है। Right to Education Act के तहत सभी बच्चों को सस्ती और समान शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि:
- निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबें अनिवार्य करना नियमों के खिलाफ हो सकता है
- इससे अभिभावकों पर “अत्यधिक आर्थिक बोझ” पड़ता है
- यह शिक्षा के समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत है
NHRC ने सभी राज्यों और केंद्र से Action Taken Report (ATR) मांगी है, ताकि इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई हो सके।
महंगी किताबों से बढ़ता आर्थिक दबाव
शिकायतों में बताया गया कि निजी प्रकाशकों की किताबें सरकारी किताबों की तुलना में कई गुना महंगी होती हैं।
उदाहरण के तौर पर:
- NCERT किताबें सामान्यतः सस्ती और सब्सिडी वाली होती हैं
- वहीं निजी प्रकाशकों के सेट हजारों रुपये तक पहुंच जाते हैं
- कई मामलों में एक ही कक्षा के लिए 3000 से 10,000 रुपये तक का खर्च सामने आया है
यह स्थिति विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।
NCERT और SCERT की भूमिका
भारत में पाठ्यक्रम और किताबों के निर्धारण में National Council of Educational Research and Training और राज्य स्तर पर SCERT की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
NHRC ने यह भी पूछा है कि:
- क्या स्कूल इन संस्थानों द्वारा निर्धारित किताबों का पालन कर रहे हैं
- क्या राज्यों ने इस पर निगरानी के लिए निर्देश जारी किए हैं
आयोग ने सुझाव दिया कि प्राथमिक स्तर पर केवल NCERT या SCERT किताबों को ही लागू किया जाना चाहिए।
30 दिन में ऑडिट का निर्देश
NHRC ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्यों को निर्देश दिया है कि:
- सभी स्कूलों की बुक लिस्ट का ऑडिट 30 दिनों में किया जाए
- यह जांच की जाए कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा
- रिपोर्ट के साथ विस्तृत जानकारी आयोग को सौंपी जाए
यह पहली बार है जब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर इतनी व्यापक जांच का आदेश दिया गया है।
RTE और NEP 2020 के तहत चिंता
NHRC ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया कि यह मामला केवल खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति स्तर का मुद्दा है।
- National Education Policy 2020 का लक्ष्य सस्ती और समावेशी शिक्षा है
- महंगी किताबें इस उद्देश्य को कमजोर करती हैं
- Right to Education Act की धारा 29 का उल्लंघन भी हो सकता है
इसके अलावा, अधिक किताबें देने से National School Bag Policy 2020 का भी उल्लंघन हो सकता है, जो स्कूल बैग के वजन को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई है।
अभिभावकों की शिकायतें और जमीनी हकीकत
देश के कई हिस्सों से अभिभावकों ने शिकायत की है कि:
- स्कूल खास दुकानों से किताब खरीदने के लिए मजबूर करते हैं
- बाजार में वही किताबें कहीं और उपलब्ध नहीं होती
- हर साल नई किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है
कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि स्कूल केवल कुछ अध्याय पढ़ाते हैं, लेकिन पूरी किताब खरीदना अनिवार्य करते हैं।
यह स्थिति शिक्षा के व्यावसायीकरण की ओर संकेत करती है, जहां शैक्षणिक जरूरत से ज्यादा आर्थिक पहलू हावी हो रहा है।
सरकार और बोर्ड की जिम्मेदारी
NHRC ने केंद्र और राज्य सरकारों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि:
- क्या उन्होंने इस समस्या पर पहले कोई कार्रवाई की है
- क्या स्कूलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं
- क्या निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था मौजूद है
इसके साथ ही CBSE से भी पूछा गया है कि वह किताबों के चयन में अपनी भूमिका स्पष्ट करे।

शिक्षा व्यवस्था पर संभावित प्रभाव
इस पूरे मामले का असर शिक्षा प्रणाली पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
संभावित प्रभाव:
- स्कूलों पर नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा
- किताबों की कीमतों में पारदर्शिता आएगी
- अभिभावकों को आर्थिक राहत मिल सकती है
- शिक्षा प्रणाली में समानता मजबूत होगी
यदि सख्ती से लागू किया गया, तो यह कदम निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव ला सकता है।
अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न
- NHRC ने निजी स्कूलों को नोटिस क्यों जारी किया है?
NHRC ने शिकायतों के आधार पर नोटिस जारी किया है कि निजी स्कूल महंगी किताबें अनिवार्य कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।
- क्या NCERT किताबें अनिवार्य हैं?
प्राथमिक स्तर पर NCERT या SCERT किताबों को प्राथमिकता दी जाती है। कई मामलों में इनका पालन करना जरूरी होता है, खासकर सरकारी नियमों के तहत।
- ऑडिट का क्या उद्देश्य है?
ऑडिट का उद्देश्य यह जांचना है कि स्कूल नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं और कहीं छात्रों को अनावश्यक रूप से महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर तो नहीं किया जा रहा।
- इस फैसले से अभिभावकों को क्या फायदा होगा?
यदि नियमों का सही पालन हुआ, तो अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा और उन्हें किताबें खरीदने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
निष्कर्ष
महंगी स्कूल किताबों का मुद्दा अब केवल शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर नीति और अधिकारों का प्रश्न बन गया है। NHRC की पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो शिक्षा में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास करती है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकारें और शिक्षा संस्थान इस पर किस प्रकार कार्रवाई करते हैं और क्या वास्तव में अभिभावकों को राहत मिल पाती है।





